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हम विश्वकर्मा है

 हम विश्वकर्मा है तोड़ना भी जानते है और जोड़ना भी जानते है तोड़ेंगे ऐसे की निखर जाओगे  जोड़ेंगे ऐसे की सवार देंगे। हम शक्ल देख कर जान जाते है कि  इसको कैसे और कब तोड़ना है। टूट हुवे बिखरे हुवे की कीमत हम जानते है कि  कब  और कहां ये काम आ जाएंगे। हमारे कदम जिस घर में पड़ जाते है  तो वह घर सवर जाता है। बिगड़ी बनाने वाले सबकी बनाने वाले  जाति धर्म का भेद नहीं किसी से कोई द्वेष नहीं । पत्थर को तराश दे तो मूर्ति  बन पूजनीय बन जाती है  कुंदन को अंगार दे तो स्वर्ण बन श्रृंगार बन जाती है  लोहे को गला दे तो वह हथियार और औजार बन जाती है। क्योंकि हम सृजन कर्ता  विश्वकर्मा है। हम सृजन कर्ता भी है और संहारक भी है , मंदिर हो या गुरुद्वारा  मस्जिद हो या गिरजाघर  हॉस्पिटल हो या धर्मशाला  न्यायालय हो या संसद भवन  विद्यालय हो या मधुशाला  हम कहा नहीं है। हम सर्वत्र है  हम है तो विज्ञान है  हम है तो इतिहास है  हम हिंदुस्तान की शान है। अब समय आ गया है कि  हम देश का निर्माण करे  क्योंकि हम जानते है  ...